अल्जाइमर की समय से पहले पहचान संभव, नया ब्लड टेस्ट देगा वर्षों पहले संकेत

Mar 25, 2026 - 20:02
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अल्जाइमर की समय से पहले पहचान संभव, नया ब्लड टेस्ट देगा वर्षों पहले संकेत

अल्जाइमर ऐसा मानसिक बीमारी है, जो धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने की क्षमता और दैनिक कार्यों को कम कर देती है। यह 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को प्रभावित करता है, जिसमें मस्तिष्क में प्रोटीन के असामान्य जमाव (प्लाक और टेंगल्स) के कारण कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।

लक्षण दिखने से पहले चल सकता है बीमारी का पता
अल्जाइमर रोग के शुरुआती निदान के लिए रक्त प्लाज्मा में विशिष्ट प्रोटीनों के संरचनात्मक और मात्रात्मक परिवर्तन महत्वपूर्ण संकेत है। इनमें शामिल हैं- पूरक 4ए और फाइब्रिनोजेन वाइ का बढ़ना, जबकि एपोलिपोप्रोटीन ए-1, ए- 2-एचएस-ग्लाइकोप्रोटीन और अफामिन में कमी होना, जो मस्तिष्क में सूजन और न्यूरोडीजेनेरेशन को दर्शाते हैं। ये बदलाव लक्षणों के प्रकट होने से वर्षों पहले न्यूरोनल क्षति और सूजन का संकेत दे सकते हैं।

नए प्रकार के ब्लड सैंपल जो अमीनो एसिड के मात्रा के बजाय उनके मोड़ने का विश्लेषण करता है, अरंभिक संकेतों का पता लगाने में सक्षम हो सकता है। 500 से अधिक व्यक्तियों के रक्त प्लाज्मा नमूनों के विश्लेषण से पता चला है कि तीन प्रोटीनों में संरचनात्मक भिन्नताएं, एक जो इम्यून सिग्नलिंग में शामिल है, दूसरा प्रोटीन मोड़ने में और तीसरा जो रक्त प्रवाह में वसा का परिवहन करता है, अल्जाइमर स्थिति से मजबूत रूप से जुड़ी हुई हैं, जैसा कि नेचर एजिंग पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों में बताया गया है।

अल्जाइमर का पता लगाने का सटीक तरीका
शोधकर्ताओं, जिनमें अमेरिका के द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के विज्ञानी भी शामिल हैं, ने कहा कि प्लाज्मा प्रोटीनों की संरचनात्मक भिन्नताएं संज्ञानात्मक रूप से सामान्य व्यक्तियों और अल्जाइमर तथा हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्तियों के बीच सटीक अंतर करने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि यह विधि अंततः प्रारंभिक निदान और उपचार की दे सकती है।

अल्जाइमर रोग का वर्तमान में निदान अमाइलाइड पट्टियों और टाऊ टंगल्स को मापकर किया जाता है, जो मस्तिष्क में अमाइलाइड और टाऊ प्रोटीनों के संचय के कारण बनते हैं, रक्त या रीढ़ की तरलता में। हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थिति को प्रोटियोस्टैसिस की व्यापक विफलता शामिल होने की आशंका बढ़ती जा रही है, जो प्रोटीनों को सही तरीके से मोड़ने और क्षतिग्रस्त प्रोटीनों को हटाने के लिए जिम्मेदार प्रणाली है।

प्रोटीन संरचना में बदलावों के कारण कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग  
यह प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ कम प्रभावी होती जाती है, जिसके कारण प्रोटीनों के निर्माण या पुनर्गठन के दौरान गलत तरीके से मोड़ने की संभावना बढ़ जाती है। द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर व वरिष्ठ लेखक जाच येट्स ने कहा कि कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग प्रोटीन संरचना में परिवर्तनों द्वारा संचालित होते हैं। सवाल यह था कि क्या विशिष्ट प्रोटीनों में संरचनात्मक परिवर्तन हैं, जो भविष्यवाणी के मार्कर के रूप में उपयोगी हो सकते हैं?

शोधकर्ताओं ने प्रस्तावित किया कि यदि मस्तिष्क में प्रोटियोस्टैसिस बाधित होती है, तो रक्त में प्रवाहित प्रोटीनों में समान संरचनात्मक परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। प्रतिभागियों के प्लाज्मा नमूनों को तीन समूहों में विभाजित किया गया संज्ञानात्मक रूप से वयस्क, हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्ति और अल्जाइमर से निदान किए गए रोगी ।

तीन प्रोटीनों के संरचनात्मक परिवर्तन रोग के साथ संबंध
विश्लेषण ने यह निर्धारित किया कि तीन-आयामी अमीनो एसिड श्रृंखला में कुछ विशिष्ट क्षेत्रों की कितनी मात्रा उजागर या दबी हुई थी, जो उनकी संरचना में परिवर्तनों को दर्शाती है। मशीन लर्निंग, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक रूप है का उपयोग रोग के चरण से जुड़े पैटर्न की पहचान के लिए किया गया। जैसे-जैसे अल्जाइमर रोग बढ़ा, विशिष्ट रक्त प्रोटीनों की संरचना कम "खुली" होती गई, जिसमें तीन प्रोटीनों के संरचनात्मक परिवर्तन रोग के साथ सबसे मजबूत संबंध दिखाते हैं।

 

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